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BPN के संस्थापक ( एक परिचय )
मातृ पितृ सदगुरु कृपा
वृक्ष कबहू नहि फल भखै,नदी न संचै नीर । परमारथ के कारनै , साधुन धरा शरीर ।। अकारण करुणालय भगवान श्री हरि की कृपा अनुग्रह से संसार में समय- समय पर क्रांतिकारी,समाजसेवक ,उपदेशक तथा परोपकारी आते ही रहते हैं I उन्ही में से एक हैं हमारे श्री बोधायन दास जी, जो कि उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के ग्राम सरौली के सुसम्पन्न ब्राह्मण परिवार में J.C.O. आर्मी अधिकारी श्री पारसनाथ उपाध्याय तथा माता श्रीमती शोभा देवी की दक्षिण कुक्षि से उत्पन्न हुए । बालक मंजीत कुमार उपाध्याय बाल्यकाल से ही मेधावी एवं कुशाग्र बुद्धि के थे ।इनके पिताश्री की शिक्षा के विषय में बहुत अच्छी सोच थी ।वे कहते थे –‘’माता शत्रु पिता वैरी , येन बालो न पाठित: ’’। श्री मंजीत कुमार उपाध्याय ने 25 वर्ष की अवस्था में ही D. Lit. तथा Ph.D. जैसी उपाधियाँ प्राप्त कर लीं, और कई शिक्षण संस्थाओं में शिक्षण - प्रशिक्षण का कार्य भी किया, किन्तु विधि का विधान कुछ और ही था I सहकर्मी शिक्षकों के प्रति वैचारिक मतभेद के कारण इनके चित्त में वैराग्य उत्पन्न हुआ और मथुरा वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री राजेंद्रदास जी का कृपा अनुग्रह प्राप्त किया।उनसे प्रेरित होकर श्रीधाम अयोध्या के परम वैराग्यवान एवं सेवाभावी संत श्री श्री 108 रामध्वज दास (फक्कड़ बाबा) की कृपा से संत परम्परा अनुसार श्री बोधायन दास नाम प्राप्त किया । उन्हे गुरु रूप में वरण करके विरक्त वेश धारण कर के रामघाट अयोध्या में माता श्री शोभा देवी के नाम से ' शोभासदन सेवा ट्रस्ट 'का निर्माण किया, जिसका विस्तार अयोध्या ,मथुरा लखनऊ आदि प्रसिद्ध स्थानो तक होता गया । माता -पिता एवं सद्गुरु की प्रेरणा से आपके द्वारा दानों में महादान विद्यादान का वृहद संकल्प आपके क्षेत्र में श्री लोधरेश्वर महादेवा में लिया गया है, जिसमें प्राथमिक शिक्षा से लेकर विविध रोजगार परक उपयोगी पाठ्यक्रमों की शिक्षण व्यवस्था हेतु संस्था कटिबद्ध है। यह संस्था समस्त क्षेत्र वासियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कोटिश: मंगलकामनाएं करती है ।